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28 नवंबर 2010

झारखंड की पंचायत में लोगों की दिलचस्पी

पंचायत चुनाव का पहला चरण छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्वक खत्म हो गया...मतदान में लोगों की भारी दिलचस्पी देखने को मिली...राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक सरायकेला खरसांवा में सबसे अधिक 79 प्रतिशत और सबसे कम मतदान खूंटी साहेबगंज में 47 प्रतिशत हुआ है...

झारखंड की पंचायत में लोगों की दिलचस्पी को देखकर अधिकारी और नेता भी हैरान है...32 वर्षो बाद हो रहे झारखंड के पंचायत चुनाव को लेकर लोगों में गजब का उत्साह दिखा...ताजा आंकड़ों के मुताबिक लगभग 64.7 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया...
यूं तो नक्सलियों ने मतदान का बहिष्कार कर रखा था...लेकिन लोगों में इसका कोई असर नहीं पड़ा...सुबह सुबह की गुलाबी सर्दी भी लोगों को वोट देने से रोक नहीं पाई...सात से सवा सात बजते बजते ही मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं की लंबी कतार देखी जा रही थी...पंचायत चुनाव की खास
बात ये है कि यहां बैलेट पेपर से चुनाव कराये जा रहे हैं...इसलिए लोगों को वोट दिलाने के लिए
कोई खास ट्रेनिंग की ज़रुरत नहीं पड़ी...चुनाव आयोग के मुताबिक कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा...हांलाकि सिमडेगा और कुछेक स्थानों पर प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प भी हुई...
पहले चरण के मतदान की समाप्ति के बाद आयोग दूसरे चरण की तैयारियों में जुट गया है...प्रशासन ने भी कमर कस रखा है...ताकि बाकी चरणों का मतदान सफलतापूर्वक कराया जा सके...

18 नवंबर 2010

छठे चरण में दिग्गजों की लिस्ट लंबी

बिहार की राजनीति में कई ऐसे दिग्गज हैं... जिनकी चर्चा न की जाए तो लगता है राजनीति का ये अखाड़ा बेरंग हो गया है.... पहले चरण से लेकर पांचवे चरण तक जब दिग्गजों की लाइन लगी हो तो फिर छठा चरण दिग्गजों का अखाडा़ कैसे नहीं बनता।
छठे चरण में सबसे पहले जिस दिग्गज के बारे में हम चर्चा करेंगे वो हैं...आरजेडी के अजित चौधरी....अजित चौधरी के बारे में बता दे कि वो चार बार लगातार चुनाव जीत चुके हैं और ब्रम्हपुर विधानसभा सीट से पांचवी बार विधानसभा पहुंचने की कोशिश में हैं...अजित चौधरी आरजेडी सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
दिग्गजों की कतार में एक ऐसे पहलवान का नाम भी आता है....जो अकेले ही मैदान में सबको शिकस्त देने की ताकत रखते हैं...हम बात कर रहे हैं डुमरांव सीट से खड़े ददन पहलवान की...तीन बार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले ददन पहलवान इस बार जेडीएस का झंडा बुलंद किये हुए हैं।
आरजेडी सांसद जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह भी पिता की वजह से दिग्गजों की कतार में शामिल हैं....पिता आरजेडी में हैं लेकिन बेटे को बीजेपी का झंडा रास आ रहा है....अब देखना ये हैं कि मोहनिया सीट पर वो क्या कमाल दिखाते हैं।
नीतीश सरकार में मंत्री रहे छेदी पासवान की किस्मत भी दाव पर लगी है....वो नोखा सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं...छेदी पासवान के सामने आरजेडी की दिग्गज नेता कांति सिंह हैं....जो केंद्र में आरजेडी के टिकट पर मंत्री रह चुकी हैं...।
दिग्गजों की लिस्ट में अगला नाम आता है अवधेश नारायण सिंह का जो डेहरी विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं....अवधेशन नारायण सिंह नीतीश सरकार में मंत्री रहे हैं।
आरजेडी की सरकार में मंत्री रहे इलियास हुसैन भी दिग्गज उम्मीदवारों की सूचि में शामिल हैं...जो डेहरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.... आरजेडी के प्रवक्ता शकील अहमद की किस्मत का फैसला भी छठे चरण में ही होना है...वो गुरूआ विधानसभा सीट से अपने विरोधियों को टक्कर दे रहे हैं...।
देखना ये है कि जब चौबीस नंवबर को ईवीएम का ताला खुलता है तो इन सभी दिग्गजों का क्या हस्र होता है।

बक्सर में नहीं चलता नक्सलियों का राज

छठे चरण में बक्सर ही एक मात्र ऐसा जिला है...जहां नक्सलियों का राज नहीं चलता.... बाकी के सभी चार जिले नक्सल प्रभावित जिले हैं...औऱ यहां कभी भी नक्सली किसी भी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
नक्सलियों के किसी भी हमले को नाकाम करने के लिए चुनाव आय़ोग की तरफ से सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किये गये हैं....सभी पोलिंग बूथ पर केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है....और पेट्रोलिंग टीम को भी मजबूत किया गया है।
इतना ही नहीं सुरक्षा के मद्देनजर चुनाव आयोग ने छब्बीस में से अठारह सीटों पर सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक ही मतदान कराने का फैसला लिया है....जबकि आठ सीटों पर सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होंगे।
इससे पहले महज 6 नक्सल प्रभावित विधानसभा सीटों के लिए मतदान का समय शाम तीन बजे तक रखा गया था... लेकिन बाद में सुरक्षा के लिहाज से गया और औरंगाबाद जिले के औरंगाबाद और नोखा विधानसभा सीटों के लिए भी मतदान के समय को घटा दिया गया.... इन दोनों क्षेत्रों में अब पांच बजे के बजाय तीन बजे तक ही मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
आपको बता दे कि छठे चरण के लिए सभी 6,761 मतदान केन्द्रों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है....जबकि इससे पहले के पांच चरण में सत्तर से अस्सी फीसदी बूथों पर ही अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाती थी।

बिहार में छठे चरण का घमासान

बिहार के फाइनल का ये अंतिम महासंग्राम है..... इस महासंग्राम में पांच जिलों की छब्बीस सीटों का फैसला होना है.....। छठे चरण में 60 लाख 7 हजार 706 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे...इनमें 27 लाख 64 हजार 578 महिला मतदाता हैं........ये सभी मतदाता 426 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे....जिसमें से 43 महिला उम्मीदवार हैं।
छब्बीस में से 18 विधानसभा क्षेत्रो में सुबह सात बजे से शाम तीन बजे तक ही मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे... जिन सीटों पर दोपहर तीन बजे तक वोट डाले जाएंगे....वो सीटें हैं...भभुआ, चेनारी, चैनपुर, नोखा, सासाराम, डेहरी, दिनारा, काराकाट, गोह, औरंगाबाद, नवीनगर, रफीगंज, कुटुम्बा, गुरूआ, बाराचट्टी, शेरघाटी, टिकारी और इमामगंज....बाकी की आठ सीटों पर सुबह सात बजे से शाम तीन बजे तक मतदान होंगे।
छठे चरण में दस सीटों पर सोलह से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में है....सासाराम में सबसे अधिक इकत्तीस उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं...जबकि मोहनिया, चेनारी, कुटुम्बा और इमामगंज में सबसे कम दस-दस उम्मीदवार चुनावी समर में किस्मत आजमा रहे हैं.।
मतदाताओं की बात करें तो सबसे ज्यादा मतदाता सासाराम में हैं जबकि सबसे कम मतदाताओं की संख्या कुटुम्बा में हैं....।
पिछले चुनाव के मतदान प्रतिशत की बात करें तो इन पांचो जिलों के छब्बीस सीटों पर 47.35 फीसदी औसत मत पड़े......अलग-अलग जिलों की मतादन प्रतिशत की बात करें तो बक्सर में 47.94 फीसदी, कैमूर में 54.17 फीसदी, रोहतास में 49.35 फीसदी, औरंगाबाद में 47.05 फीसदी औऱ गया में 38.96 फीसदी मत पड़े थे....।

बक्सर में छठे चरण का घमासान


बक्सर जिले में चार विधानसभा सीटें हैं...ब्रह्मपुर,बक्सर,डुमरांव और राजपुर...नये परिसीमन में इन चारों सीटों के नामों परिवर्तन तो नही हुआ...लेकिन चारों विधानसभा सीटों के भौगोलिक बदलाव जरुर हुये हैं...अगर बात ब्रह्मपुर विधानसभा सीट की करें तो नवम्बर दो हजार पांच के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के अजीत चौधरी ने बाजी मारी थी...अजित चौधरी लगातार चार दफे इस सीट पर कब्जा जमाये हुये हैं...लेकिन इस बार इनको टक्कर देने के लिये बीजेपी ने दिलमणी देवी को मैदान में उतारा है..वहीं बीएसपी के टिकट पर अरविंद सिंह भाग्य आजमा रहे हैं....मुख्य लड़ाई इन्हीं तीनों प्रत्याशियों के बीच होने के आसार दिख रहे हैं...
अब बात बक्सर विधानसभा सीट की....नवम्बर दो हजार पांच के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीएसपी के टिकट पर हृदयानंद सिंह ने बाजी मारी थी...लेकिन इस बार बीएसपी ने हृदयानंद सिंह को बेटिकट कर दिया है...क्योंकि इन पर पार्टी विऱोधी गतिविधि में रहने का आरोप है...वहीं बीएसपी ने कुंवर विजय सिंह को मैदान में उतारा है...तो आरजेडी के टिकट पर श्यामलाल कुशवाहा भाग्य आजमा रहे हैं...तो सीपीआईएम के टिकट पर बिहार महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष मंजू प्रकाश ताल ठोंक रही हैं...
बात डुमरांव विधानसभा सीट की करें तो लगातार तीन बार से बतौर निर्दलीय ददन पहलवान कब्जा जमाए हुये हैं...और इस बार जेडीएस के टिकट पर भाग्य आजमा रहे हैं...वहीं इनको मात देने के लिये जेडीयू ने जहां दाउद अली पर दांव खेला है...तो आरजेडी के टिकट पर सुनील कुमार ताल ठोक रहे हैं
और अंत में बात राजपुर विधानसभा सीट की...नवम्बर दो हजार पांच के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर श्यामप्यारी देवी ने बाजी मारी थी...लेकिन श्यामप्यारी देवी के निधन हो जाने से जेडीयू ने इस बार संतोष कुमार निराला को मैदान में उतारा है...तो एलजेपी के टिकट पर छेदीलाल राम ताल ठोक रहे हैं....वहीं बीएसपी के पंकज कुमार लड़ाई को दिलचस्प बनाये हुये हैं...
अगर नवम्बर दो हजार पांच के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर एक नजर डालें तो जेडीयू,बीजेपी,आरजेडी और निर्दलीय को एक एक सीट मिली थी...इस बार के चुनाव में किसका पलड़ा भारी है..ये कहना मुश्किल है...क्योंकि स्थानीय मुद्दे हावी दिख रहे हैं...और स्थिति में बाजी किसके पाले में जाऐगा..ये तो 24 नवम्बर को हीं पता चल पायेगा...

13 नवंबर 2010

छठ संपन्न, लोकतंत्र के महापर्व की तैयारियां शुरू

लोक आस्था का महापर्व छठ संपन्न हो चुका है. इसके साथ ही बिहार में एक बार फिर लोकतंत्र के महापर्व की तैयारियां शुरू हो गयी हैं. 20 नवंबर को बिहार विधानसभा के छठे चरण का मतदान होना है. छठे चरण में छह ज़िलों की कुल 26 सीटों पर मतदान होंगे. जिनमें बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया की पाँच सीटों पर लोग मतदान करेंगे. सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चीत करने के लिये चुनाव प्रचार तेज़ कर दिया है.
 छठे चरण के मतदान में कई दिग्गजों की क़िस्मत दांव पर लगी होगी. जिसमे आरजेडी के अजीत चौधरी, जगदानंद सिंह, महाबली सिंह, जेडीयू की श्यामप्यारी देवी, छेदी पासवान, बिजेपी के रामेश्वर चौररसिया,सुखदा पांडे, बीएसपी के हृदय नारायण सिंह, अखिल जन विकास दल के ददन पहलवान अपना- अपना भाग्य आजमायेंगे. कुल मिलाकर आखिरी चरण के मतदान में विभीन्न पार्टियों के
बीच जोरदार टक्कर होने वाली है. खासकर जेडीयू और आरजेडी के बीच कांटे का मुकाबला नजर आता है. अब तक संपन्न हुए पांच चरणों के मतदान में सभी पार्टियां अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही हैं. इसलिये कोई भी इस आखिरी जंग में जीत के लिये कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है. 

07 नवंबर 2010

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चुनाव

छठे चरण के महासंग्राम में जिन इलाकों में चुनाव हो रहे हैं... उनमें से ज्यादातर नक्सली हिंसा और सूखे से प्रभावित इलाके हैं... साथ ही ये इलाका जातीय विद्वेष पर आधारित हिंसा के लिए कुख्यात हैं। आठ जिले में छह जिलों में नक्सलियों का राज है....जबकि एक जिला भोजपुर आंशिक रूप से नक्सल प्रभावित इलाका है....नक्सलियों ने अपने प्रभाव वाले इलाके में पोस्टर चिपकाकर लोगों से वोट बहिष्कार की अपील की है। पांचवे चरण में जहानाबाद सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिला है.
पिछले डेढ़ दशक में नक्सलियों ने यहां जितना खुन बहाया है शायद ही उतना खून पिछले साठ दशक में प्रदेश के किसी और हिस्से में बहाया गया हो....नक्सलियों के साथ-साथ जहानाबाद में जातिय विद्वेष की वजह से कई नरसंहार को भी अंजाम दिया गया है।जहानाबाद के बाद नक्सल प्रभावित इलाके में शेखपुरा और अरवल का नाम आता है....नक्सलियों ने यहां भी जमकर तांडव मचाया है......नालंदा और नवादा भी ऐसे जिले हैं....जो नक्सलियों के आतंक से त्रस्त हैं..... प्रदेश में
जब नक्सल प्रभावित इलाकों की बात होती है...तो गया का नाम जरूर आता है.... यहां के शेरघाटी में नक्सलियों की इजाजत के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता.... सरकारी भवन हो या फिर मोबाइल कंपनियों के टावर नक्सलियों का जब दिल करता है...एक ही झटके में इन्हे तबाह कर दिया जाता है। भोजपुर जिला भी नक्सलियों के आतंक से अछुता नहीं है....हालांकि यहां जहानाबाद और गया की तरह नक्सलियों का राज नहीं चलता है....लेकिन ये कहना कि यहां नक्सलियों का आतंक नहीं है, बेमानी है।

पांचवें चरण का घमासान

बिहार के फाइनल के लिए चार चरण के महासंग्राम के बाद अब बारी पांचवे महासंग्राम की बारी है....प्रदेश के दौ सौ तैंतालीस सीटों के लिए छह चरणों में हो रहे चुनाव में पांचवे चरण में आठ जिलों की पैंतीस सीटों के लिए घमासान हो रहा है। पांचवें चरण में शेखपुरा, नालंदा, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद और नवादा जिलों की सभी विधानसभा सीटों के साथ-साथ पटना के चार और गया के पांच विधानसभा सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं.... इस चरण में में 35 सीटों के लिए 490 प्रत्याशी चुनावी समर में हैं.... जिसमें 44 महिला प्रत्याशी और 178 निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
इन चार सौ नब्बे उम्मीदवारों की किस्मत के फैसले के लिए 81 लाख 57 हजार 832 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.... जिसमें 37 लाख 43 हजार 342 महिला मतदाता हैं... इन मतादाताओं के लिए 10 हजार 400 मतदान केंद्र बनाये गये हैं.... जिसमे ग्रामीण क्षेत्र में 7 हजार 840 औऱ शहरी क्षेत्र में 1135 मतदान केंद्र हैं। छह विधानसभा सीटों पर सोलह से अधिक उम्मीदवार होने की वजह से एक से ज्यादा वैलेट यूनिट लगाए गये हैं...
गया टाउन औऱ अरवल में सबसे अधिक ग्यारह-ग्यारह उम्मीदवार हैं..जबकि सबसे कम आठ उम्मीदवार शाहपुर सीट पर किस्मत आजमा रहे हैं। सतारूढ़ पार्टी जेडीयू ने 23 और उसकी सहयोगी बीजेपी ने 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे हैं...जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के 20, और उसकी सहयोगी एलजेपी के 15,एनसीपी के 20,बीएसपी के 34 और कांग्रेस के पैंतीस उम्मीदवारों की किस्मत पांचवे चरण में दाव पर लगी हुई है। पांचवें चरण के चुनाव में जिन दिग्गजों के भाग्य का फैसला होने वाला है उसमें मंत्री हरिनारायण सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा, जीतन राम मांझी, प्रेम कुमार,
जेडीयू के मुख्य सचेतक श्रवण कुमार, श्याम रजक, प्रदेश महिला कांग्रेस प्रकोष्ठ की पूर्व अध्यक्ष सुनीला देवी का नाम प्रमुख हैं। अब तक विधानसभा की 182 सीटों के लिए मतदान का काम पूरा हो चुका है....इस चरण में पैंतीस सीटों के लिए घमासान जारी है.... और आखिरी यानि की छठे चरण में छब्बीस सीटों पर चुनाव होना है।

06 नवंबर 2010

पांचवा चरण-नालंदा में घमासान

By:Nilesh Kumar
9210940987
सात-सात शताब्दियों तक एशिया का बौद्दिक केंद्र रहनेवाला नालंदा बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र हैं.... और प्रदेश का सबसे प्रसिद्द दर्शनीय स्थल। नालंदा विश्वविद्यालय हो या फिर राजगीर, हिंदुस्तान आने वाला हर पर्यटक नालंदा जरूर आना चाहता है।
नालंदा की राजनीतिक जमीन की बात करें तो परिसीमन के बाद इस जिले में आठ की जगह सात विधानसभा सीटें रह गई है.... चंडी विधानसभा सीट अब खत्म हो गई है....।
सबसे पहले बात करते हैं अस्थवां सीट की.... अस्थवां सीट पर पिछले चुनाव में जेडीयू के टिकट पर जितेंद्र कुमार ने बाजी मारी थी.... और इस बार भी जितेंद्र कुमार ही जेडीयू की ओर से मैदान में हैं... जबकि उनको टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने सतीश कुमार को और एलजेपी ने गणेश राम को मैदान में उतारा है....।
अब बात करते हैं... बिहार सीट यानि की बिहारशरीफ सीट की.... इस सीट पर भी पिछली बार जेडीयू का ही कब्जा था और सुनील कुमार यहां से चुनाव जीते थे....इस बार भी सुनील कुमार जेडीयू के उम्मीदवार हैं... जबकि उनके सामने आरजेडी की आफरिन सुल्ताना और कांग्रेस के हैदर आलम चुनावी मैदान में खम ठोक रहे हैं।
बात करे राजगीर सीट के महासंग्राम की तो इस बार यहां से बीजेपी के सत्यदेव नारायण आर्य, कांग्रेस की मोनी देवी और एलजेपी के धनंजय कुमार के बीच सीधा मुकाबला है... पिछले चुनाव में ये सीट बीजेपी के खाते में गई थी और सत्यदेव नारायण आर्य ने यहां से चुनाव जीता था।
और, अब बात करते हैं इस्लामपुर सीट की... यहां से जेडीयू के टिकट पर पिछला चुनाव रामश्वरूप प्रसाद ने जीता था.... जबकि इस बार जेडीयू के टिकट पर यहां से राजीव रंजन मैदान में हैं.... राजीव रंजन को टक्कर देने के लिए आरजेडी के बिरेन्द्र गोप और कांग्रेस के विवेक सिंह भी चुनावी मैदान में अपनी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
हिलसा विधानसभा सीट की बात करें तो.... जेडीयू के टिकट पर यहां से रामचरित्र प्रसाद सिंह ने जेडीयू से चुनाव जीता था... जो इस बार निर्दलीय ही मैदान में खम ठोक रहे हैं... जबकि जेडीयू ने यहां से उषा सिन्हा को मैदान में उतारा है....उषा सिन्हा से लोहा लेने के लिए कांग्रेस के अरूण कुमार और एलजेपी की रीना देवी भी मैदान में हैं।
नालंदा सीट की जंग भी कुछ कम रोमांचक नहीं है... पिछले चुनाव में यहां से जेडीयू के टिकट पर श्रवण कुमार ने चुनाव जीता था... और इस बार भी जेडीयू ने श्रवण कुमार पर ही दाव लगाया है... जबकि उनसे टक्कर लेने के लिए कांग्रेस ने दिलीप सिंह पर और आरजेडी ने अरूण कुमार पर भरोसा जताया है।
आखिर में बात करते हैं.... हरनौत सीट की, पिछले चुनाव में यहां से जेडीयू के टिकट पर सुनील कुमार ने बाजी मारी थी... जबकि इस बार यहां से जेडीयू के टिकट पर हरिनारायण सिंह मैदान में हैं....हरिनारायण सिंह के सामने कांग्रेस की वसुंधरा कुमारी और एलजेपी के अरूण कुमार मैदान में खड़े हैं।
अब देखना ये है कि नालंदा के महासंग्राम में जनता सबसे अधिक किस पार्टी पर अपना भरोसा जताती है...।

31 अक्टूबर 2010

पटना की लड़ाई पर सबकी नज़रें टिकी

राजधानी पटना में चौदह विधानसभा सीटें हैं.... जिसमें दस विधानसभा सीटों पर चौथे चरण में मतदान हो रहे हैं.... परिसीमन के बाद पटना जिले के कई विधानसभा सीटों की भौगोलिक स्थिति में बदलाव हुआ है साथ ही कई नये विधानसभा सीटें भी अस्तित्व में आ गई हैं। 
सबसे पहले बात राजधानी से दूर स्थित मोकामा विधानसभा सीट की....इस सीट पर 2005 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के अनंत कुमार सिंह विजयी रहे थे...इस बार भी जेडीयू के टिकट पर अनंत कुमार सिंह ही चुनावी मैदान में विरोधियों को परास्त करने में लगे हैं.....अनंत कुमार सिंह से टक्कर लेने के लिए एलजेपी की सोनम देवी और कांग्रेस के टिकट पर पूर्व मंत्री श्याम सुन्दर सिंह चुनाव मैदान में हैं।अब बात बाढ़ विधानसभा सीट की....नबंबर 2005 के विधानसभा चुनाव में बाढ़ विधानसभा सीट से जेडीयू के ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने जीत हासिल की थी...इस बार भी जेडीयू ने ज्ञानेंद्र कुमार सिंह को ही मैदान में उतारा है....
आरजेडी की तरफ से पू्र्व सांसद विजय कृष्ण पर मैदान में हैं तो कांग्रेस ने विजय कुमार सिंह को यहां से टिकट दिया है। बख्तियारपुर विधानसभा सीट की बात करें तो नवंबर 2005 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर यहां से विनोद यादव विजयी रहे थे..इस बार भी बीजेपी ने विनोद यादव पर ही दाव खेला है....जबकि आरजेडी की तरफ से अनिरुद्व यादव एक बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं....वहीं कांग्रेस के टिकट पर रामायण प्रसाद लड़ाई को दिलचस्प बनाने में लगे हुए हैं। 
 परिसीमन के बाद दीघा सीट अस्तित्व में आई है.... पहले ये सीट मसौढ़ी विधानसभा सीट के नाम से जानी जाती थी...इस सीट से जेडीयू ने वर्तमान विधायक पूणम देवी को मैदान में उतारा है....पूणम देवी ने पिछले चुनाव में मसौढ़ी विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी... पूणम देवी को टक्कर देने के लिये एलजेपी ने सत्यानंद शर्मा पर दांव खेला है.तो कांग्रेस ने राजेश कुमार सिंह को मैदान में उतारा है।
पटना पश्चिम विधानसभा सीट का अस्तित्व नये परिसीमन में खत्म हो गया है...अब ये सीट बांकीपुर बन गया है.... पिछले चुनाव में बीजेपी के नीतीन नवीन ने पटना पश्चिम से जीत हासिल की थी.... इस बार भी बीजेपी के टिकट पर नीतीन नवीन भाग्य आजमा रहे हैं... वहीं आरजेडी ने विनोद कुमार श्रीवास्तव को टिकट दिया है...तो कांग्रेस के टिकट पर दुर्गा प्रसाद भाग्य आजमा रहे हैं
कुम्हरार विधानसभा सीट परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है......ये सीट पहले पटना मध्य थी.....और पिछले चुनाव में यहां से बीजेपी के अरुण कुमार सिंह ने जीत हासिल की थी... इस बार भी बीजेपी ने अरुण कुमार सिंहा पर दाव खेला है....वहीं एलजेपी टिकट पर कमाल परवेज भाग्य आजमा रहे हैं...तो कांग्रेस ने कपिलदेव प्रसाद यादव को मैदान में उतारा है...। 
पटना पूर्वी विधानसभा सीट का अस्तित्व भी अब खत्म हो गया है.... और अब ये सीट पटना साहेब हो गया है....यहां से बीजेपी के टिकट पर कई बार विधायक बन चुके नंदकिशोर यादव एक बार फिर बीजेपी के ही टिकट पर भाग्य आजमा रहे हैं...नंदकिशोर यादव को टक्कर देने के लिए आरजेडी ने राजेश कुमार पर दांव खेला है... जबकि कांग्रेस के टिकट पर परवेज अहमद भाग्य आजमा रहे हैं।
अब बात फतुहा विधानसभा सीट की.... फतुहा विधानसभा सीट से नवंबर 2005 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के सरयुग पासवान ने जीत हासिल की थी...इस बार जेडीयू ने अजय कुमार सिंह को मैदान में उतारा है...वही अजय को टक्कर देने के लिये आरजेडी ने रामानंद यादव को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस के टिकट पर रामजी सिंह मैदान में हैं....।
दानापुर विधानसभा सीट की बात करें तो बीजेपी ने आशा सिंह पर एक बार फिर से भरोसा जताया है... आशा सिंह ने बीजेपी के टिकट पर नवंबर दो हजार पाच के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी....वहीं आरजेडी ने आशा सिंह को टक्कर देने के लिये सच्चितानंद राय को मैदान में उतारा है.... वहीं कभी लालू के साथ रहनेवाले विजय यादव पाला बदलकर कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमा रहे हैं...।
और अंत में बात मनेर विधानसभा सीट की.... मनेर विधानसभा सीट की लड़ाई इस बार दिलचस्प हो गई है.... क्योंकि नवंबर 2005 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीतनेवाले श्रीकांत निराला इस बार पाला बदलकर जेडीयू के टिकट पर चुनावी अखाड़े में खम ठोक रहे हैं...वहीं आरजेडी ने भाई विरेंद्र पर दांव खेला है...तो कांग्रेस के टिकट पर अशोक ज्ञान मैदान में है....।
प्रदेश की राजधानी होने की वजह से पटना जिले की चुनावी लड़ाई पर सबकी नज़रें टिकी है....यहां की चौदह प्रदेश की राजनीतिक समीकरण बदलने के लिए काफी है....लिहाजा हर पार्टी ने यहां अपनी पूरी ताकत झौंक दी है...बाकि जनता जनार्दन के हाथों में हैं।

30 अक्टूबर 2010

चौथे चरण में भी आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार

 बिहार के फाइनल में चौथे चरण में भी आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की कोई कमी नहीं है...... इस चरण में 91 उम्मीदवार ऎसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.... इन 91 उम्मीदावारों में से 49 पर हत्या और हत्या की साजिश जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
चुनाव सुधारों की दिशा में काम कर रहे संगठन एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स  और नेशनल इलेक्शन वॉच की ओर से जारी आंक़डों के मुताबिक चौथे चरण में भी सभी राजनीतिक दलों ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट दिया है..इस रिपोर्ट के मुताबिक चौथे चरण में आरजेडी ने सबसे अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दिया है....आरजेडी की ओर से बासठ फीसदी उम्मीदवार दागी है.... 
आरजडेडी के बाद बीजेपी का नंबर आता है....जिसने तीरपन फीसदी दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया.... बीजेपी के बाद तीसरे नंबर पर कांग्रेस है जिसके इकतालीस फीसदी उम्मीदवार दागी है..... जबकि इस क्रम में चौथे नंबर पर आने वाली एलजेपी के चालीस फीसदी उम्मीदवार दागी है..... दागी उम्मीदवारों को टिकट देने में जेडीयू भी पीछे नहीं हैं और उसके अड़तीस फीसदी उम्मीदवार दागी है.... मायावती की पार्टी में भी दागियों का बोलबाला है और उसके सैंतीस फीसदी उम्मीदवार दागी है.....।
आंक़डों के मुताबिक पहले चार चरणों में कुल 1237 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं... जिसमें से 481 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं.... इनमें से 288 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं.... चारों चरणों की समीक्षा की जाए तो बीजेपी के 73 में से 47, एलजेपी के 53 में से 32, आरजेडी के 122 में से 69, कांग्रेस के 171 में से 64, जेडीयू के 102 में से 54 और बसपा के 164 में से 62 उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं।

13 अक्टूबर 2010

आमने सामने लालू- नीतीश

बिहार की जमीन पर राजनीतिक जंग हो रही है...और हर कोई अपनी जमीन मजबूत बनाने के लिए जनता से वादे करने में लगा हुआ है...मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शासनकाल में साइकिल योजना शुरू की थी....तो लालू उसके जवाब में मोटरसाइकिल बांटने की योजना बना रहे हैं। 
अब अगर लालू मोटरसाईकिल बांटने की बात कर रहे हैं तो फिर भला मुख्यमंत्री क्यों चुप रहते.....उन्होंने उल्टा लालू पर ही निशाना साध लिया और कहा कि वो मोटरसाइकिल तो बांट देंगे....लेकिन गरीब जनता मोटरसाइकिल में तेल कहां से डालेगी। 
शालीन अंदाज में विरोधियों पर निशाना साधने में नीतीश कुमार कभी पीछे नहीं रहते....लगे हाथों उन्होंने लालू के उस वादे को भी आड़े हाथों ले लिया की गरीब जनता को वो मुफ्त में बिजली कैसे बांटेंगे।
बहरहाल,रणभूमि में जुबानी जंग और वायदों की भरमार जारी है जो धीरे-धीरे औऱ तेज होती जाएगी....अब देखना ये है कि किसके वादे और किसका निशाना जनता के दिलों तक पहुंचता है।

11 अक्टूबर 2010

पहले चरण का महासंग्राम

छह चरण में हो रहे महासंग्राम के पहले चरण में सैंतालीस सीटों के लिए घमासान हो रहा है.और, पहले चरण के महासंग्राम से ही अगले पांच चरण के महासंग्राम की दिशा और दशा तय होगी। पहले चरण में सैंतालीस विधानसभा सीटों के लिए छह सौ छत्तीस उम्मीदवारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई है.....जो जीतेगा वो विधायक बनकर विधानसभा पहुंचेगा...और जिस पार्टी के सबसे ज्यादा रणबांकुरे मैदान मारेंगे...उसे बिहार की सत्ता नसीब होगी।
यूं तो विधानसभा पहुंचने के लिए सात सौ ग्यारह प्रत्याशियों ने नामांकन का पर्चा भरा था....लेकिन चौवालीस लोगों के नामांकन का पर्चा रद्द होने और इकत्तीस लोगों के पर्चा वापिस लेने के बाद छह सौ छत्तीस उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गये हैं। सैंतालीस सीटों की जंग में सभी सीटों पर कांग्रेस और बीएसपी के रणबांकुरें विरोधियों से दो-दो हाथ कर रहे हैं.... जबकि बीजेपी के इक्कीस, जेडीयू के छब्बीस , आरजेडी के इकत्तीस और एलजेपी के सोलह योद्दा जीत का बिगुल बजाने को तैयार हैं...।
जीत का बिगुल कौन बजाएगा....औऱ किसके घर हार का सन्नाटा पसरेगा...ये जनता जनार्दन के हाथ हैं....और उनकी क्या राय है.... ये तो चौबीस नबंबर को पता चलेगा...फिलहाल जंग जारी है।

08 अक्टूबर 2010

वोट से इनकार का अधिकार

बाहुबलियों और दागी उम्मीदवारों के बीच कभी-कभी मतदाताओं को ये समझ में नहीं आता कि वो किसको वोट करे... सही उम्मीदवार का चयन नहीं कर पाने की हालत में ज्यादातर मतदाता वोट देने ही नहीं जाते....लेकिन इस बार ऐसे मतदाताओं के लिए खास इंतजाम हैं...........अगर आपको आपके विधानसभा क्षेत्र से खड़े किसी प्रत्याशी को वोट नहीं देना है.......और वोटिंग का बहिष्कार भी नहीं करना है तो इसके लिए खास व्यवस्था की गयी है।
इस व्यवस्था के तहत ईवीएम में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.....इस बार भी आपको मतदान के दौरान पहले की तरह ही ईवीएम मशीन मिलेगी.....आपको बस इतना करना है कि आप वह नामांकन की सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वोट देने से इंकार कर दे।
इसके लिए मतदान केन्द्र पर मौजूद पीठासीन अधिकारी मतदाता सूची में मतदाता नाम के आगे नोट लगायेंगे कि इन्हें कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया इसलिए इन्होंने किसी को वोट नहीं दिया।
बिहार के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी कुमार अंशुमाली ने बताया है कि इस बार के चुनाव में ऐसी व्यवस्था की गयी है कि यदि मतदाता किसी को वोट नहीं देना चाहे तो वह नामांकन की सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वोट देने से इंकार कर सकता है......चुनाव आयोग के कंडक्ट ऑफ इलेक्शन नियम के फोर्टी नाइन ओ के तहत यह व्यवस्था पहले से मौजूद है..... लेकिन ये नियम बिहार में पहली बार लागू किया जा रहा है।

नारों की लड़ाई

निलेश कुमार
बिहार में विधानसभा चुनाव में कविताओं का दौर थमने के बाद अब नारा युद्द की शुरूआत हो गई है.....हर पार्टी अपने-अपने हिसाब से नारों का इस्तेमाल कर रही है....सबसे पहले बात राज्य की सत्ताधारी पार्टी जेडीयू की.....एक नजर डालते हैं जेडीयू के दिलचस्प नारों पर....
बोल रहा है टीवी अखबार सबसे आगे नीतीश कुमार
बढ़ता बिहार नीतीश कुमार
पांच साल बनाम पचपन साल
........................................... जेडीयू के साथ-साथ बीजेपी ने भी कुछ ऐसा नारा बनाया है जो न केवल विपक्ष पर निशाना साधने वाला है बल्कि वोटरों को लुभाने वाला है।
अपना वोट विकास को
बढ़ता बिहार, बनता बिहार
पांच साल, बिहार खुशहाल
.....................देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी नारा युद्द में पीछे नहीं है...
ना कोई बात ना कोई जात, सिर्फ राहुल की बात कांग्रेस के साथ
हमारी लड़ाई उनसे है, जो सिर्फ बात बनाते हैं
जरूरत है काम की, बिहार के ऊंचे नाम की.......जैसे नारे रणभूमि में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं...।
इधर, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी..भ्रष्टाचार मिटाओ, कुशासन भगाओ के नारे पर जोर आजमाईश कर रही है....।
लोकसभा चुनाव में सुपड़ा साफ होने के बाद नारों के इस युद्द में एलजेपी भी पीछे नहीं है....और वह
एलजेपी- आरजेडी गठबंधन की है ललकार, चुनाव के बाद मेरी सरकार
...................... के दम पर अपना आत्म विश्वास बढ़ा रही है।
उधर सीपीआईएमएल का नीतीश बाबू का नया बिहार,घोषणाबाजी व भ्रष्टचार...भाकपा माले की यही पुकार, भूमि सुधार, नया बिहार जैसे नारों को लेकर अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कवायद में जुटी हुई है।
राज्य में चुनाव प्रचार अब धीरे-धीरे जोर पक़डता जा रहा है और किस पार्टी का नारा मतदाताओं को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा....फिलहाल नारों का युद्द जारी है।

07 अक्टूबर 2010

आरजेडी फर्स्ट फेज में

पहले चरण में हो रहे मतदान में राष्ट्रीय जनता दल का काफी कुछ दांव पर लगा है...जिन 47सीटों पर पहले चरण में मतदान हो रहा है...उसमें 2005 के चुनाव में पार्टी ने मात्र 4 चार सीटों पर जीत हासिल की थी...और 24 सीटों पर दूसरे स्थान पर थी इस लिहाज से आरजेडी के पास अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए शानदार मौका है.

बिहार विधानसभा के महासंग्राम में पहले चरण की जंग सीमांचल और कोसी की रणभूमि में लड़ी जा रही है.....सीमांचल में जहां अल्पसंख्यक वोट चुनावी योद्दाओं की किस्मत तय करते हैं वहीं कोसी के इलाके में यादवों की जय जयकार गुंजती है....यानि इस इलाके को हम एम वाई समीकरण का गढ़ कह सकते हैं....एम वाई यानि की लालू प्रसाद यादव की वो चुनावी गणित जिसके बल पर उन्होंने बिहार में डेढ़ दशक तक राज किया........लेकिन दो हजार पांच के चुनाव में इस इलाके में लालू का तिलस्म टूट कर बिखर गया और सैंतालीस में से महज चार सीटें उनके हाथ लगी।
जिन 47सीटों पर पहले चरण में चुनाव होने को है उनमें राष्ट्रीय जनता दल के काफी संभावनाएं है...इसका आभास आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को भी है...इसलिए वो इन इलाकों में ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार में जुट गये हैं...पिछले विधानसभा चुनाव में इन सीटों में से आरजेडी मात्र चार सीटों पर चुनाव जीत पाई थी...इनमें से किशनगंज...रुपौली...धमदाहा और प्रानपुर सीट शामिल है...जबकि 24सीटों पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी...जीते हुए स्थानों पर पार्टी को मिलने वाला औसत वोट लगभग....प्रतिशत था...जबकि आरजेडी जहां दूसरे नंबर पर रही थी वहां पार्टी को मिलने वाला वोट प्रतिशत....था...खास बात ये है कि कई सीटों पर हार का अंतर तो दो हजार वोटों से भी कम था...अगर इन सीटों पर पार्टी थोड़ा सा भी जोर लगाती तो आंकड़ों की तस्वीर बदल सकती थी...पिछली बार लालू और पासवान ने बिहार के फाइनल में अलग अलग किस्मत आजमाई थी...लेकिन इस बार दोनों योद्धा साथ हैं...अगर इस बार रामविलास पासवान का पंरपरागत वोट बैंक लालू को समर्थन करता है...तो आरजेडी का ग्राफ बढ़ सकता है...यहीं बात पासवान के साथ भी लागू होती है...

हालांकि इस बार चुनाव बिलकुल अगल हालात में हो रहे हैं...और चुनाव के मुद्दे भी अलग हैं...लेकिन पहले चरण में जहां जहां चुनाव हो रहे हैं...वहां के कई दिग्गजों ने लालू यादव का साथ छोड़ दिया है...इस कड़ी में किशनगंज से मुस्लिम नेता तस्लीमुद्दीन का नाम शामिल है...लालू के कद्दावर सिपहसालारों में एक तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम इस बार जेडीयू से चुनाव लड़ रहे हैं...और वे लालू के मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकते हैं...
किशनगंज से अख्तरूल इमान, रूपौली से बीमा भारती, धमदाहा से दिलीप कुमार यादव, प्रानपुर सीट से महेन्द्र नारायण यादव........................ने आरजेडी को इस इलाके में जिंदा रखा.... जबकि चौबीस सीटों के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे।
हरलाखी SITA RAM YADAV,खजौली RAM LAKHAN RAM RAMAN
बाबूबरही UMA KANT YADAV, मधुबनी ASLAM, झंझारपुर RAM AUTAR CHAUDHARY, लौकहा ANIS AHMAD, पिपरा SURENDRA KR. CHANDRA
सुपौल MD. ISRAIL RAYEEN, त्रिवेणीगंज ANITA DEVI, छातापुर MAHENDRA NARAYAN SARDAR, नरपतगंज ANIL KUMAR YADAV, रानीगंज SHANTI DEVI

फारबिसगंज ZAKIR HUSSAIN KHAN, जोकिहाट SARFRAZ ALAM, बायसी ABDUS SUBHAN, कस्बा MD. AFAK ALAM, बनमनखी KANT LAL RISHI, पूर्णिया RAM CHARITRA YADAV, कटिहार DR. RAM PRAKASH MAHTO
सिंघेश्वर ARVIND KUMAR, मधेपुरा DR. ASHOK KUMAR, सोनबर्षा RANJIT YADAV, सहरसा DR. ABDUL GAFOOR, महिषी SURENDRA YADAV

05 अक्टूबर 2010

कांग्रेस में परिवारवाद

हाफिज गफूर अब्दुल गफूर का पोता बरौली से
फैयाजुल आलम रैफल आजम का पुत्र सिकटा से
भावना झा स्व.योगेश्वर झा की पुत्री बेनीपट्टी से
हरखू झा स्व.राधानंदन झा का पुत्र झंझारपुर से
मो.जावेद आजाद स्व.मो.हुसैन आजाद का पुत्र किशनगंज से
संयोगिता सिंह स्व. दिनेश सिंह की पुत्री बरारी से
रुपम यादव नागेन्द्र यादव का पुत्र सीतामढ़ी से
ताहिर अनीस खान नसीरुद्दीन ख़ान का पुत्र बेलसंड से
अशोक कुमार स्व. बालेश्वर राम का पुत्र कुशेश्वर स्थान से
मदन मोहन झा स्व. नरेन्द्र झा का पुत्र अलीनगर से
उमेश राम स्व.फकीरचंद्र राम का पुत्र सकरा से
तरुण कुमार हरिनारायण चैधरी का पुत्र समस्तीपुर से
रामविलास महतो बंधु महतो का पुत्र विभूतिपुर से
अनुनय कुमार सिंह उषा सिन्हा का पुत्र पारू से
उमर सैफुल्लाह खान हिदायतुल्ला खान का पुत्र सुगौली से
महेश राय स्व. नगीना राय का पुत्र कुचायकोट से
अनिल कुमार स्व. चन्द्रिका राय का पुत्र भोरे से
विधानचन्द्र राय दारोगा राय का पुत्र आमौर से
महेश प्रसाद राय जगन्नाथ राय का पुत्र महनार से
मो. अहमद हसन दुलारे शकील अहमद का संबंधी बिस्फी से

30 सितंबर 2010

आरजेडी के उम्मीदवारों की सूची

हरलाखी- रामाशीष यादव
खजौली -सीताराम यादव
बाबूबरही- उमाकांत यादव
बिस्फी -फैयाज अहमद
मधुबनी -नैयर आजम
राजनगर -रामलखन राम रमण
झंझारपुर -जगत नारायण
फुलपरास -वीरेंद्र कुमार चैधरी
लोकहा -चितरंजन प्रसाद यादव
निर्मली -अरुणा मेहता
सुपौल -रविन्द्र कुमार रमण
छातापुर -अकील अहमद
नरपतगंज -अनिल कुमार यादव
रानीगंज- शांति देवी
जोकीहाट-अरुण यादव
बहादुरगंज- अनजार नईमी
किशनगंज -तसीरउद्दीन
कोचाधामन- अख्तरुल इमान
अमौर बाबर- आजम
बायसी -अब्दुस सुभान
बनमनखी- घर्मलाल )षि
धमदाहा- दिलीप कुमार यादव
कटिहार- रामप्रकाश महतो
कदवा -ख्वाजा बहुद्दीन अहमद
प्राणपुर- महेंद्र नारायण यादव
बरारी -मंसूर आलम
बिहारीगंज -प्रभाष कुमार
सिंहेश्वर- अमित कुमार भारती
मधेपुरा -चंद्रशेखर
सहरसा- अरुण कुमार
महिषि -अब्दुल गफुर
शिवहर -अजीत कुमार झा
परिहार -रामचंद्र पुर्वे
सुरसंड -जयनंदन प्रसाद यादव
बागपट्टी -मो0 अनवारुल हक
रुन्नीसैदपुर- रामशत्रुघ्न राय
बेलसंड -संजय कुमार गुप्ता
बेनीपुर- हरिभूष्ण यादव
अलीनगर- अब्दुल बारी सिद्दिकी
दरभंगा ग्रामीण- ललित कुमार यादव
दरभंगा- सुल्तान अमहद
गौराबौराम- महावीर प्रसाद
बहादुरपुर- हरिनंदन यादव
केवटी- पराज पादमी
जाले- रामनिवास प्रसाद
गायघाट -महेश्वर प्रसाद यादव
औराई -सुरेंद्र कुमार
बोचहां- मुसाफिर पासवान
सकरा- लालबाबू राय

कांटी- मो0 इसराइल
बरुराज- ब्रजकिशोर सिंह
वारिसनगर -गजेंद्र प्रसाद सिंह
समस्तीपुर -इस्लाम शाहीद
उजियारपुर- दुर्गा प्रसाद सिंह
मोरवा -अशोक सिंह
सरायरंजन - रामश्रय सहनी
मोहिउद्दीनगर -अजय कुमार बुलागिन
रोसडा -पीताबंर पासवान
हसनपुर -सुनील कुमार पुष्पम
मधुबन -राणा रंधीर
चिरइया- लक्ष्मी नारायण यादव
मीनापुर -राजीव कुमार
पारु- मिथिलेश प्रसाद यादव
साहेबगंज -रामविचार राय